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About The School

St. Mary's School, Mainpuri, stands as a testament to the visionary zeal and educational acumen of its founders who, in the year 1985, embarked on a mission to shape the future of Mainpuri through the corridors of knowledge. The genesis of this educational institution is rooted in the collective wisdom of seasoned educationists and practical visionaries, individuals whose extensive experience in the realm of education provided the bedrock for a journey that would span decades.

Nestled in the heart of Mainpuri, a city burgeoning with the promise of rapid development, the inception of St. Mary's was driven by a shared sentiment among well-wishing friends and citizens. They recognized a pressing need for a school equipped with a broad and modern education system, one tailored to nurture the nascent minds of primary stage children. The foundational belief was that, from their earliest years, these young learners should be immersed in an educational environment that embraced the latest pedagogical approaches and modern teaching methods.

The acclaim and support garnered by St. Mary's School underscore the resonance of this vision with the community it serves. Over the past three decades, the school has emerged as a bastion of progress, making rapid strides across diverse spheres. Its journey is a testament to the unwavering commitment of the school's leadership and the collective efforts of its stakeholders.

At the helm of this transformative journey was Mrs. S. Das, the ingenious mind behind the conceptualization of the school. A distinguished figure in the field of child education and a stern disciplinarian, Mrs. Das, the former Principal of Kr. R. C. Kanya Inter College, Mainpuri, infused the institution with a spirit of excellence. Under her guidance, St. Mary's School underwent a metamorphosis, evolving into one of Mainpuri District's premier educational establishments... Read More

About SKD

Life at St. Mary’s School

Activities SKD

News and Updates

सेन्ट मेरीज़ स्कूल में 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है......

सेन्ट मेरीज़ स्कूल आश्रम रोड विद्यालय में पूर्ण हर्षोल्लास से 79वाँ स्वतंत्रतादिवस मनाया गया। प्रातः सभी विद्यार्थी हाथ में तिरंगा लेकर सफ़ेद यूनीफार्म में विद्यालय में उपस्थित हुए। देश-प्रेम से ओत-प्रोत ‘नारे’ लगाकर विद्यालय परिसर गुंजायमान कर दिया। आज के कार्यक्रम में सर्वप्रथम प्रधानाचार्या श्रीमती मनोरमा जी ने ध्वजारोहण किया, त्वरित बाद ही विद्यालय प्रांगण में राष्ट्रगान गूँज गया। के०जी० की छात्रा यशिका ने अपने भाषण में कहा कि हमें भारतीय होने पर गर्व है तथा देश के विकास मे ंहम सभी का योगदान होना चाहिये। कक्षा तीन की अपूर्वा ने बताया कि देश की आज़ादी के लिए अनेक रणबांकरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। कक्षा ग्यारह की छात्रा आन्या जैन ने शहीदों की स्मृति में काव्यापाठ करके लोगों के मनों को भावुक कर दिया। महक एण्ड ग्रुप ने- ऐ मेरे देश...... गीत गा कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जूनियर कक्षा की छात्राओं ने- दूर है मंजिल और रास्ता कठिन...... देशभक्ति गीत का सस्वर पाठ किया। वरिष्ठ अध्यापक श्री अजीत शर्मा ने अपने संदेश में कहा, कि दो सौ साल की गुलामी के बाद अमर शहीदों ने बहुत भारी कीमत चुकाई तब जाकर हम स्वतंत्र हुए। आज जरूरत है कि यदि हम सभी स्वतः अपने-अपने कार्य ईमानदारी और निष्ठा से करें तो देश की गति सुचारू रहेगी तथा विद्यार्थी जीवन में अनुशासन अति आवश्यक है अतः प्रत्येक विद्यार्थी को अपने अध्ययन कार्य को पूर्ण ईमानदारी से करते रहना चाहिये। प्राधानाचार्या महोदया ने अपने संदेश में कहा, कि देश की आज़ादी की हमने बड़ी कीमत चुकाई है। असंख्य कुर्बानियों के बाद आज हमसुख भरा जीवन जी रहे हैं अतः हमारा दायित्व है कि हम इस स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखें। विद्यार्थी देश का भविष्य है अतः सभी को अपने कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिये तो हमारे अधिकार स्वतः सुरक्षित हो जाएगें तथा हमारे राष्ट्रीय पर्व हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहते हैं और आज़ादी के अमृतकाल में पूर्ण स्वाभिमान तथा मनोबल के साथ पवित्र मनःभाव से देश प्रेम को समर्थ बनाए रखना है। कार्यक्रम के अन्त में सहायक निदेशक श्री कुशाग्र दास ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया तथा मिष्ठान्न वितरण के साथ सभी विद्यार्थी प्रसन्नतापूर्वक अपने घरों की ओर रवाना हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रियांशु नंदन, आयुष श्रीवास्तव, वैष्णवी सिंह तथा नित्या गुप्ता ने किया। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि डा० मंजरी अग्निहोत्री प्रभारी प्राचार्या, शा० कन्या महाविद्यालय, सीहोर (म०प्र०), प्रधानाचार्या श्रीमती मनोरमा जी, प्रबंधक श्री दीपक जी० दास, सहायक निदेश श्री कुशाग्रदास, सहायक निदेशक श्रीमती नेहल डी० दास, उप-प्रधानाचार्या श्रीमती वीना चौहान, श्रीमती जॉली जॉर्ज, इंचार्ज श्रीमती कमलेश गेरा, श्रीमती संतोषी, सुश्री आकांक्षा पाठक, श्रीमती परिणीता दुबे, श्रीमती अंजना अधिकारी समस्त शिक्षक वर्ग तथा सम्पूर्ण विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

शुगर से सम्बन्धित वर्कशॉप

दिनांक 14.07.2025 को आश्रम रोड स्थित सेन्ट मेरीज़ विद्यालय में शुगर (शक्कर) को संतुलित मात्रा में उपयोग करने हेतु वर्कशाप का आयोजन किया गया। इसमें कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग लिया, जिसके अर्न्तगत विद्यार्थियों ने शुगर बोर्ड व चार्ट तैयार किए जिनमें शीतल पेय पदार्थ (कोल्ड ड्रिंक) एवं जंग फूड में मौजूद शुगर की मात्रा को दर्शाया गया। कक्षा नौ के विद्यार्थी अर्निका यादव, भावेश चौहान, देवान्शी, आशी पचौरी व अनुरुद्ध सिंह ने बच्चों को शुगर नियन्त्रण के महत्व को समझाया। वर्कशॉप में उच्च रक्त शर्करा से होने वाली विभिन्न बीमारियों के विषय में अवगत कराया। इसके अतिरिक्त शर्करा के विकल्पों के विषय में बताया जिसमें फल से बनने वाले जूस स्टीविया प्लांट व पैदल सीरव इत्यादि शामिल हैं। विज्ञान शिक्षिका सुश्री प्रतीक्षा चौहान के द्वारा शुगर बोर्ड की अहमियत बताई गई तथा आज के जन मानस इसको कितना उपयोग करें की इसके विषय में चर्चा की। विज्ञान शिक्षक अतुल चौहान ने एन्टीवबॉयोरिक्स रेसिस्टेंस एव इंशुलिन रेसिस्टेंस के विषय में समझाया। इससे सम्बधित कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के छात्र-छात्राओं हेतु एक एक्सीविशन के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने शुगर के इस्तेमाल से सम्बधित और अधिक जानकारी हासिल की। इस वर्कशाप में विद्यालय के प्रबन्धक महोदय श्री दीपक जी० दास, प्रधानाचार्या श्रीमती मनोरमा जी, एसोसिएट डायरेक्टर श्री कुशाग्र दास, उप-प्रधानाचार्या श्रीमती वीना चौहान, सुश्री जॉली जार्ज, इन्चार्ज श्रीमती कमलेश गेरा, अध्यापिका श्रीमती भावना बैज़ल तथा श्वेता मिश्रा उपस्थित रहे।

सेन्ट मेरीज़ स्कूल में विहंगम झाँकियाँ लगाई गई

सेन्ट मेरीज़ स्कूल आश्रम रोड विद्यालय में ‘विहंगम सजीव झाँकियों’ का आयोजन किया गया। पिछले बीस वर्षों से प्रतिवर्ष जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर विद्यालय में सजीव झाँकियों का अयोजन किया जाता रहा है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कुँवरानी शिवकुमारी का प्रधानाचार्या श्रीमती मनोरमा जी ने तिलक लगाकर स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने कन्हैया जी के चित्र के समक्ष ‘दीप प्रज्ज्वलन’ किया। अतिथि देवो भवः की परंपरा का पालन करते हुए प्रधानाचार्या ने समस्त अतिथियों को कृष्णनामी पट्टिका ओढ़ा कर प्रतीक चिह्न भंेट किये। तत्पश्चात सेंन्ट मेरीज़ स्कूल की मुख्य शाखा के नन्हें-मुन्नें बालगोपाल तथा राधा रानी और गोपियों के रूप सुसज्ज्ति बालिकाएँ आकर्षण का प्रमुख केन्द्र रहीं। अतिथियों ने सुसज्जित झाँकियों को सराहा। मेहमान अभिभावकों के दर्शनार्थ प्रातः ग्यारह बजे झाँकियों को खोल दिया गया था। ज्ञात रहे कि विद्यालय में छः हाउस हैं यथा महाराजा तेज सिंह हाउस, गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर हाउस, डा० सर्वपल्ली राधा कृष्णन् हाउस, मदर टेरेसा हाउस, स्वामी विवेकानंद हाउस तथा रानी लक्ष्मीबाई हाउस- इन सभी सदनों ने अपने हाउस के सौजन्य से सजीव झाँकियों का सजाया था। अतिथि श्री भूपेन्द्र राठौर, श्री प्रमाद दुबे, इसरो के वैज्ञानिक श्री गिरधारी बंसल, श्री दयाशंकर तिवारी, श्रीमती रजनी, प्रसिद्ध बाँसुरी बादक श्री अनिल, सी०ओ०सिटी श्री संतोष कुमार सिंह अपराह्न तीन बजे तक विशाल भीड़ अनवरत विद्यालय प्रांगण में आती रही। पिछले वर्षों में पढ़ चुके छात्र-छात्राओं ने भी विद्यालय में आकर अपने पुराने दिनों को याद कर अपनी सुखद स्मृतियों को ताजा किया। झाँकियों को निहारते हुए दर्शकों का मन ही नहीं भर रहा था और दर्शकों से बार-बार आग्रह किया जा रहा था, लगातार चलते रहें, जिससे किसी को असुविधा न हो तथापि बार-बार चक्का जाम की स्थिति बनती रही। सर्वप्रथम झाँकी नं० वन महाराजा तेज सिंह हाउस के सौजन्य से बालक कृष्ण कारागार में जन्म तथा वासुदेव के द्वारा बालक कृष्ण को सुरक्षित गोकुल पहुँचाने का दृश्य दिखाया गया। अध्यापिका ज्यौत्स्ना राठौर तथा रिजवान खान के कुशल नेतृत्व में तेज सिंह हाउस के छात्रों ने सुसज्जित झाँकी लगाई। छात्रों ने झाँकी सज्जा के सभी उपादान अपने हाथों से बनाए थे। श्री अजीत शर्मा ने झाँकी में विशेष सहयोग दिया। स्वामी विवेकानंद हाउस की ओर से बालक कृष्ण के द्वारा कागासुर नामक राक्षस का वध इस दृष्य को दिखाया गया। उक्त झाँकी श्रीमती सपना चौहान एवं श्रीमती रीता के द्वारा छात्रों को दिशा निर्देश दिया गया तथा छात्रों ने अक्षरतः पालन करते हुए खूबसूरत झाँकी लगाई। झाँकी नम्बर तीन में विदर्भ की राजकुमारी रूक्मिणी के द्वारा ‘गौरी पूजन’ तथा रूक्मिणी-कृष्ण का मंगल परिणय का दृश्य दिखाया गया। यह झाँकी डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के सदन की ओर से सुसज्जित की गई थी। अध्यापिका सुश्री प्रतीक्षा चौहान तथा अजीत कुशवाह के कुशल नेतृत्व में छात्र पिछले दस दिन से कार्यरत थे। झाँकी नं० चार में मदर टेरेसा हाउस ने ‘कर्णवध’ की झाँकी लगाई, उक्त झाँकी श्रीमती नंदनी कोहली तथा श्री मयंक सक्सेना के नेतृत्व में लगाई थी। महान धनुर्धर कर्ण का वध का दृष्यांकन अति-कारूणिक था। झाँकी नं० पाँच में बर्बरीक का श्रीकृष्ण को शीशदान का दृश्य का फिल्मांकन किया गया। महाभारत के युद्ध में भीम के पौत्र बर्बरीक ने स्वेच्छा से अपना शीश श्रीकृष्ण को दे दिया था और कलयुग में राजस्थान के सीकर के खाटू नामक ग्राम में बर्बरीक का शीष खाटू श्याम मंदिर में स्थापित है। झाँकी नं छः में रानी लक्ष्मीबाई हाउस के सौजन्य से त्रेतायुग के ‘बाली वध’ का दृश्य तथा द्वितीय पक्ष में द्वापर युग के अंत में भगवान श्रीकृष्ण के महाप्रयाण के दृश्य को दर्शाया गया था। उक्त झाँकी का नेतृत्व श्रीमती भावना बैजल तथा चंद्रशेखर के द्वारा किया गया था। झाँकी की साज-सज्जा के लिए पिछले पन्द्रह दिनों से छात्र अपने अध्ययन के साथ-साथ झाँकी की सज्जा की तैयारी में संलग्न रहे। सायंकाल चार बजे झाँकियों का समापन किया गया। ‘झाँकी महोत्सव’ के उत्सव में अपार भीड़ आती रही तथा प्रबंध तंत्र सजगतापूर्वक अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहा। प्रधानाचार्या श्रीमती मनोरमा, प्रबंधक श्री दीपक जी० दास, सहायक निदेशक श्री कुशाग्र दास, सहायक निदेशक श्रीमती नेहल डी० दास, उप-प्रधानाचार्या श्रीमती वीना चौहान, श्रीमती जॉली जार्ज, इंचार्ज श्रीमती कमलेश गेरा, आकांक्षा पाठक, श्रीमती संतोषी श्रीमती अंजना अधिकारी, श्रीमती कृतिका तथा सम्पूर्ण विद्यालय परिवार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अध्यापक श्री मयंक सक्सेना ने किया। विद्यार्थियों यथा- श्रेया श्रीवास्तव, आन्या जैन, कनक राजपूत, रिद्धिमा सिंह तथा हर्षित यादव ने कार्यक्रम संचालन में विशेष सहयोग दिया। बाँसुरी वादक श्री अनिल शाक्य ने बाँसुरी पर- यशोमति मैया से .......... गीत की मधुर धुन बजाई। अतिथि स्वागत टीम में वरिष्ठ छात्र आयुष सक्सेना तथा वरिष्ठ छात्रा वैष्णवी सिंह तथा अध्यापिका श्रीमती मिताली मिश्रा, नेहा नाज़, श्रीमती दिशि, सुश्री सुम्बुल, सुश्री चंचल यादव, श्रीमती भावना श्रीवास्तव ने विशेष सहयोग दिया। प्रसाद वितरण के लिए श्री नागेश श्रीवास्तव, श्री ए० के० जैन, श्री अशोक पाण्डेय तथा श्री गोपाल कृष्ण ने अपना पूर्ण सहयोग किया। प्रबंधक श्री दीपक जी० दास ने आए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा झाँकी सज्जा में सहयोग करने वाले सभी छाात्रों के क्रिया कलापों को सराहा तथा घोषणा की कि सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किये जाएँगे।

THREE-DAY SCOUT AND GUIDE CAMP: A JOURNEY OF DISCIPLINE, SKILLS, AND SPIRIT

St. Mary’s School, Mainpuri, proudly conducted a three-day Scout and Guide Camp on campus, aimed at fostering self-reliance, teamwork, and essential life skills among students. The camp, filled with energy and learning, provided students with a hands-on experience that helped them connect with the values of discipline, service, and leadership. From the very first day, students were introduced to basic survival tactics, including how to set up tents, manage a campsite, and live in outdoor conditions. Under the guidance of experienced Scout and Guide educators, they learned how to prepare meals from scratch, cook in the open, and organise themselves as efficient teams. The activity not only taught them how to manage in limited-resource environments but also encouraged collaboration and responsibility. The students also took part in daily prayers. Each House worked together to decorate their tents, demonstrating creativity, cooperation, and a sense of healthy competition. Flags, banners, and eco-friendly materials added colour and enthusiasm to the entire camp area. Over the period of three days, students experienced a well-balanced mix of discipline, physical activity, moral education, and fun. The camaraderie built during this time strengthened bonds among students and gave them a strong foundation of teamwork and shared responsibilities. On the final day of the camp, Vice Principal Ms. Jolly George visited the site for an official inspection. She interacted with the participants, appreciated their effort and coordination, and expressed her admiration for their dedication. In a short ceremony, she extended a warm farewell to the Scout and Guide educators.

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